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आईसीएआर-एनडीआरआई का 22वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 253 छात्रों को मिली डिग्री
डेयरी क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में अहम, 2047 तक बढ़ेगी मांग—डॉ. एम.एल. जाट
करनाल में आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के 22वें दीक्षांत समारोह में 253 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इस दौरान डेयरी सेक्टर की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-NDRI) का 22वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को डॉ. डी. सुंदरासन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. एम.एल. जाट (DARE सचिव एवं ICAR महानिदेशक) उपस्थित रहे।
इस समारोह में कुल 253 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। अपने मुख्य भाषण में डॉ. जाट ने बताया कि डेयरी क्षेत्र ₹17.25 लाख करोड़ के पशुपालन सेक्टर में 65 प्रतिशत योगदान देता है और भारत की सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यह क्षेत्र देश की 46.1 प्रतिशत आबादी का सहारा है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में पशुपालन के लिए ₹6,153 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस राशि का उपयोग 20,000 पशु चिकित्सकों की भर्ती, कॉलेजों और प्रयोगशालाओं को सब्सिडी देने तथा सहकारी संस्थाओं को कर राहत प्रदान करने के लिए किया जाएगा, जिससे “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को बल मिलेगा।
डॉ. जाट ने बताया कि भारत का दूध उत्पादन 1950 में 17 मिलियन टन से बढ़कर 2025 में 247 मिलियन टन हो गया है। इस उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी है, जबकि पंजाब और हरियाणा प्रति पशु उत्पादन (यील्ड) में शीर्ष पर हैं।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग के अनुसार 2047 तक दूध की मांग 480 से 606 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।
देश में कुल दूध उत्पादन में स्वदेशी भैंसों का योगदान सबसे अधिक (31.18%) है, इसके बाद क्रॉसब्रेड गायें (30.80%), स्वदेशी गायें (11.20%), सामान्य नस्ल की गायें (9.64%), सामान्य भैंसें (11.97%), बकरियां (3.32%) और विदेशी नस्ल की गायें (1.89%) का योगदान है।
उन्होंने टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फसल और पशुपालन के एकीकृत मॉडल (सर्कुलर क्रॉप-लाइवस्टॉक मॉडल) की सराहना की, जो आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
डॉ. जाट ने एनडीआरआई की सौ साल पुरानी विरासत की भी प्रशंसा की, जिसके करनाल, बेंगलुरु और कल्याणी में परिसर हैं। उन्होंने संस्थान के 100 प्रतिशत प्लेसमेंट रिकॉर्ड और “डिग्री टू कंपनी” इनक्यूबेटर के जरिए पिछले वर्ष 10 तकनीकों के व्यावसायीकरण की सराहना की।
यह समारोह छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और देश के डेयरी क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना जा रहा है।

