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लोक कला महोत्सव का भव्य समापन, रंगारंग प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन
डॉ. रीता शर्मा बोलीं—लोक कला हमारी सांस्कृतिक पहचान की नींव
संस्कृति मंत्रालय और अन्य संस्थाओं के सहयोग से आयोजित लोक कला महोत्सव का समापन रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन किया गया।
यह महोत्सव संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर, धर्म पुत्र कला मंच और छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
समापन समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रीता शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। विक्रांत सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया, जबकि रविंद्र शर्मा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुदेश ने की।
अपने संबोधन में डॉ. रीता शर्मा ने कहा कि लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की नींव हैं और इन्हें संरक्षित एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राम कुमार मित्तल ने कहा कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक सशक्त साधन है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न राज्यों की टीमों ने रंगारंग लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। इनमें पंजाब का लुड्डी, हरियाणा का पारंपरिक घूमर, असम का बारदोई शिकला, महाराष्ट्र का लावणी, राजस्थान का चरी नृत्य और उत्तर प्रदेश का डेडिया नृत्य शामिल रहे।
इसके अलावा पंजाब के एक लोक बैंड और गायिका गुरलीन कौर की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह महोत्सव भारतीय लोक संस्कृति की विविधता और समृद्धि को प्रदर्शित करने का एक शानदार मंच साबित हुआ।
