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HSGMC में वर्चस्व की जंग के बीच ‘संगत की कचहरी’ शुरू करेंगे अध्यक्ष, 40 निर्वाचित सदस्यों से मांगी जाएगी जवाबदेही
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा ने संगत से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की, 4 सितंबर को करनाल के जलमाना गांव से होगी शुरुआत।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (HSGMC) में जारी खींचतान के बीच अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा ने ‘संगत की कचहरी’ शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत निर्वाचित सदस्य संगत से गुरुद्वारों, विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं पर सीधे संवाद करेंगे।
HSGMC में बढ़ती खींचतान के बीच नई पहल
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (HSGMC) में सदस्यों के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई के बीच समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा ने ‘संगत की कचहरी’ पहल शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस अभियान का उद्देश्य HSGMC के निर्वाचित सदस्यों और सिख समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। इसके तहत समिति के 40 निर्वाचित सदस्यों को अपने-अपने वार्ड में संगत के साथ बैठकें करने और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कहा जाएगा।
4 सितंबर को करनाल से होगी ‘संगत की कचहरी’ की शुरुआत
HSGMC अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा के अनुसार, इस पहल का पहला कार्यक्रम 4 सितंबर को करनाल जिले के असंध ब्लॉक स्थित जलमाना गांव में आयोजित किया जाएगा।झींड़ा ने बताया कि वह अपने वार्ड से इस अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद सभी 40 निर्वाचित सदस्यों से उनके संबंधित वार्ड में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सुविधाजनक तारीख साझा करने को कहा जाएगा।
संगत सीधे पूछ सकेगी अपने प्रतिनिधियों से सवाल
‘संगत की कचहरी’ के दौरान समुदाय के सदस्य अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से चुनाव के दौरान किए गए वादों की स्थिति के बारे में सवाल कर सकेंगे।
इसके अलावा किन विकास कार्यों को पूरा किया गया है, कौन से काम लंबित हैं और भविष्य में किन परियोजनाओं पर काम होना है, इन मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
सिख समुदाय के लोग अलग-अलग गुरुद्वारों की जरूरतों और सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी बैठक में उठा सकेंगे।
HSGMC के लंबित कामों पर भी होगी चर्चा
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समिति के मौजूदा कामकाज और विकास परियोजनाओं को लेकर संगत को जानकारी देना भी है।
HSGMC अध्यक्ष के मुताबिक, समुदाय को यह जानने का अधिकार है कि निर्वाचित सदस्यों ने चुनाव के समय जो वादे किए थे, उनमें से कितने पूरे हुए और कौन से कार्य अभी बाकी हैं।
गुरुद्वारों की आवश्यकताओं तथा विभिन्न लंबित परियोजनाओं पर भी ‘संगत की कचहरी’ में चर्चा किए जाने की योजना है।
बैठक में शामिल नहीं हो रहे असंतुष्ट सदस्यों पर भी नजर
‘संगत की कचहरी’ को HSGMC के भीतर जारी विवाद के राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समिति के अध्यक्ष उन असंतुष्ट सदस्यों को भी इस पहल के जरिए घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जो कार्यकारी निकाय और जनरल हाउस की बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
झींड़ा के अनुसार, कई निर्वाचित सदस्यों के बैठकों में शामिल नहीं होने के कारण समिति के कामकाज पर असर पड़ा है।
2025-26 और 2026-27 का बजट अभी तक पास नहीं
HSGMC के भीतर जारी मतभेदों का असर समिति की वित्तीय और विकास संबंधी गतिविधियों पर भी पड़ा है। बैठकों में सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के बजट अब तक पारित नहीं हो सके हैं।
इस स्थिति के चलते विकास कार्यों और समिति के नियमित संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अध्यक्ष बोले- समिति को ठप करने के लिए नहीं चुने गए प्रतिनिधि
जगदीश सिंह झींड़ा ने कहा कि समुदाय ने निर्वाचित सदस्यों को HSGMC का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए चुना है, न कि समिति के कामकाज को रोकने के लिए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति के कारण सिख समुदाय में समिति के कामकाज को लेकर गलत संदेश जा रहा है। ‘संगत की कचहरी’ के दौरान इस मुद्दे को भी समुदाय के सामने रखा जाएगा।
अध्यक्ष का मानना है कि निर्वाचित सदस्यों और संगत के बीच सीधे संवाद से न केवल लोगों की समस्याएं सामने आएंगी, बल्कि समिति के कामकाज को लेकर जवाबदेही भी तय होगी।
Key Highlights:
- HSGMC अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा ने ‘संगत की कचहरी’ पहल शुरू करने का फैसला किया।
- अभियान का उद्देश्य निर्वाचित सदस्यों और सिख संगत के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है।
- HSGMC के सभी 40 निर्वाचित सदस्य अपने-अपने वार्ड में कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
- पहला कार्यक्रम 4 सितंबर को करनाल के असंध ब्लॉक स्थित जलमाना गांव में होगा।
- संगत चुनावी वादों, विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं पर सवाल उठा सकेगी।
- गुरुद्वारों की जरूरतों और अन्य सामुदायिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
- कई सदस्यों के बैठकों से दूर रहने के कारण HSGMC के 2025-26 और 2026-27 के बजट अभी तक पारित नहीं हुए हैं।
- HSGMC अध्यक्ष ने कहा कि समुदाय ने सदस्यों को समिति का कामकाज सुचारु रखने के लिए चुना है।
FAQ Section:
HSGMC की ‘संगत की कचहरी’ क्या है?
‘संगत की कचहरी’ HSGMC की प्रस्तावित पहल है, जिसके तहत निर्वाचित सदस्य सिख समुदाय के साथ सीधे बैठक कर उनकी समस्याओं, गुरुद्वारों की जरूरतों और विकास कार्यों पर चर्चा करेंगे।
‘संगत की कचहरी’ की शुरुआत कब और कहां होगी?
इस पहल का पहला कार्यक्रम 4 सितंबर को करनाल जिले के असंध ब्लॉक स्थित जलमाना गांव में आयोजित होगा।
HSGMC में कितने निर्वाचित सदस्य हैं?
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति में 40 निर्वाचित सदस्य हैं। सभी सदस्यों से अपने-अपने वार्ड में ‘संगत की कचहरी’ आयोजित करने के लिए तारीख साझा करने को कहा जाएगा।
संगत इस कार्यक्रम में क्या मुद्दे उठा सकती है?
संगत चुनावी वादों, पूरे और लंबित विकास कार्यों, गुरुद्वारों की जरूरतों और अन्य सामुदायिक परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे उठा सकती है।
HSGMC के बजट अभी तक क्यों लंबित हैं?
समिति के अनुसार, कई निर्वाचित सदस्यों के कार्यकारी निकाय और जनरल हाउस की बैठकों में शामिल नहीं होने के कारण वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के बजट पारित नहीं हो सके हैं।
Conclusion:
HSGMC में जारी आंतरिक खींचतान के बीच ‘संगत की कचहरी’ पहल समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींड़ा के लिए संगत से सीधे जुड़ने और निर्वाचित सदस्यों की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। 4 सितंबर को जलमाना गांव से शुरू होने वाली यह पहल कितनी प्रभावी रहती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्वाचित सदस्य इसमें कितनी सक्रियता से भाग लेते हैं। वहीं, लंबित बजट और विकास कार्यों के मुद्दे के कारण HSGMC के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान पर भी समुदाय की नजर बनी रहेगी।
