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पंजाब में कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन, सितंबर-अक्टूबर में धरने, सामूहिक छुट्टी और रैलियों का ऐलान
पंजाब सांझा मुलाजिम मंच ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की घोषणा की, 6 सितंबर से 22 अक्टूबर तक कई चरणों में होंगे विरोध प्रदर्शन।
पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ने के संकेत हैं। पंजाब सांझा मुलाजिम मंच ने सितंबर और अक्टूबर के लिए सामूहिक छुट्टी, मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन और बड़ी रैली सहित व्यापक आंदोलन कार्यक्रम घोषित किया है।
पंजाब सरकार के खिलाफ कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने का किया ऐलान
लुधियाना में रविवार को पंजाब सरकार के कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया। पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के बैनर तले विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सितंबर और अक्टूबर के दौरान चरणबद्ध आंदोलन करने की घोषणा की है।
आंदोलन का फैसला लुधियाना स्थित बचत भवन में आयोजित कर्मचारी संगठनों की बैठक में लिया गया। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित मांगों पर समाधान नहीं होने के कारण अब आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
6 सितंबर से शुरू होगा आंदोलन का नया चरण
कर्मचारी संगठनों की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 6 सितंबर को जिला स्तर पर सभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 8 सितंबर को राज्यभर के कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।इसके अलावा 12 और 13 सितंबर को कर्मचारी पंजाब के मंत्रियों के आवासों के बाहर प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारी संगठनों ने 10 अक्टूबर को संगरूर में एक बड़ी रैली आयोजित करने का भी फैसला किया है।
आंदोलन के अगले चरण में 21 और 22 अक्टूबर को कर्मचारी फिर से सामूहिक कैजुअल लीव पर जाएंगे।
मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रतीकात्मक अभियान का ऐलान
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन के तहत एक विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा भी की है। इस अभियान को “चंडीगढ़ सचिवालय से मुख्यमंत्री की गांव सतोज वापसी” नाम दिया गया है।
इस अभियान के माध्यम से कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के पूरा होने तक सरकार पर दबाव बढ़ाने का प्रयास करेंगे। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा उनकी लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
30 सितंबर को चंडीगढ़ में लगेगी प्रतीकात्मक ‘कर्मचारी विधानसभा’
कर्मचारी संगठनों ने 30 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रतीकात्मक रूप से ‘कर्मचारी विधानसभा’ आयोजित करने का फैसला किया है।
इस कार्यक्रम में पंजाब के सभी 117 विधायकों और 13 सांसदों को आमंत्रित किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों के अनुसार जनप्रतिनिधियों के लिए सीटों की व्यवस्था की जाएगी और उनसे कर्मचारियों तथा पेंशनरों से जुड़े मुद्दों पर सीधे सवाल किए जाएंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को भी समर्थन
पंजाब सांझा मुलाजिम मंच की समन्वय समिति ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के साथ एकजुटता जताने का भी निर्णय लिया है।
कर्मचारी संगठन चंडीगढ़ में 1 सितंबर से 7 सितंबर तक प्रस्तावित किसानों के आंदोलन में भाग लेंगे। इससे पंजाब में विभिन्न कर्मचारी और किसान संगठनों के आंदोलनों को एक साथ समर्थन मिलने की संभावना है।
27 अगस्त की सामूहिक छुट्टी से बढ़ा सरकार-कर्मचारी विवाद
पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव 27 अगस्त को और गहरा गया था। उस दिन तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक कैजुअल लीव लेकर आंदोलन में भाग लिया था।
उसी दिन जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बैठक प्रस्तावित थी। हालांकि, यह बैठक उस समय रद्द हो गई जब मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया कि बातचीत तभी होगी जब कर्मचारी संगठन अपना आंदोलन समाप्त करेंगे।
बैठक रद्द होने के बाद कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी देखी गई। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और बातचीत के मुद्दे पर उन्हें नजरअंदाज किया गया।
बिना अनुमति अनुपस्थित कर्मचारियों को नोटिस के निर्देश
इस बीच राज्य सरकार की ओर से प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए कि बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं।
इस कार्रवाई के बाद कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच पहले से जारी टकराव और बढ़ गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कार्रवाई और दबाव के बजाय सरकार को उनकी मांगों के समाधान के लिए बातचीत करनी चाहिए।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
सरकारी कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। आंदोलन का मुख्य आधार इन मांगों को जल्द लागू कराने का दबाव बनाना है।
प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लंबित महंगाई भत्ता (DA) की किस्तें जारी करना।
- DA के बकाया भुगतान का निपटारा।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना।
- ठेका और संविदा कर्मचारियों को नियमित करना।
- 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों को मानक पंजाब वेतनमान देना।
- मिड-डे मील, आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करना।
- कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित अन्य लंबित मांगों का समाधान करना।
Key Highlights:
- पंजाब सांझा मुलाजिम मंच ने सितंबर और अक्टूबर के लिए व्यापक आंदोलन की घोषणा की।
- 6 सितंबर को जिला स्तर पर कर्मचारी सभाएं आयोजित होंगी।
- 8 सितंबर को राज्यभर में सामूहिक छुट्टी का कार्यक्रम।
- 12 और 13 सितंबर को मंत्रियों के आवासों के बाहर प्रदर्शन।
- 30 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रतीकात्मक ‘कर्मचारी विधानसभा’ आयोजित होगी।
- 10 अक्टूबर को संगरूर में बड़ी रैली प्रस्तावित।
- 21 और 22 अक्टूबर को फिर सामूहिक कैजुअल लीव की घोषणा।
- कर्मचारी संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन में भी शामिल होंगे।
- कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में DA, OPS और कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है।
FAQ Section:
पंजाब के कर्मचारी आंदोलन का नया चरण कब शुरू होगा?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार आंदोलन का नया चरण 6 सितंबर से जिला स्तर की सभाओं के साथ शुरू होगा।
पंजाब में कर्मचारी सामूहिक छुट्टी पर कब जाएंगे?
पहला राज्यव्यापी सामूहिक अवकाश 8 सितंबर को होगा। इसके बाद 21 और 22 अक्टूबर को भी कर्मचारी सामूहिक कैजुअल लीव पर जाने की घोषणा कर चुके हैं।
पंजाब के कर्मचारी किन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?
कर्मचारी लंबित DA, DA एरियर, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और पंजाब के मानक वेतनमान सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
संगरूर में कर्मचारी रैली कब होगी?
कर्मचारी संगठनों ने 10 अक्टूबर को संगरूर में बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है।
कर्मचारी विधानसभा कब और कहां आयोजित होगी?
30 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रतीकात्मक ‘कर्मचारी विधानसभा’ आयोजित करने की योजना बनाई गई है, जिसमें पंजाब के 117 विधायकों और 13 सांसदों को आमंत्रित किया जाएगा।
Conclusion:
पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी विवाद अब सितंबर और अक्टूबर में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। सामूहिक छुट्टियों, मंत्रियों के आवासों के बाहर प्रदर्शनों और संगरूर की बड़ी रैली के ऐलान के बाद सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को लेकर बातचीत शुरू करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या आंदोलन और व्यापक होता है।
