- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- PM मोदी ने की थी ‘स्वच्छता से स्वागत’ की तारीफ, एक महीने बाद हड़ताल ने हरियाणा के शहरों की सफाई व्यव...
PM मोदी ने की थी ‘स्वच्छता से स्वागत’ की तारीफ, एक महीने बाद हड़ताल ने हरियाणा के शहरों की सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल
जींद दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को संस्कृति बनाने की बात कही थी, लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद सफाई कर्मचारियों की लंबी हड़ताल से शहरी हरियाणा में कचरे के ढेर और व्यवस्था की चुनौतियां सामने आ गईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद दौरे के दौरान ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की सराहना की थी। अब सफाई कर्मचारियों की चौथे सप्ताह में पहुंची हड़ताल ने हरियाणा के शहरों में कचरे की समस्या बढ़ा दी है और ठेका आधारित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
PM मोदी की स्वच्छता अपील के एक महीने बाद शहरों में कचरे का संकट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद दौरे के दौरान ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की सराहना करते हुए कहा था कि स्वच्छता एक ऐसा सरल कार्य है, जिसे लोगों की आदत और संस्कृति का हिस्सा बनना चाहिए।
हालांकि, इसके करीब एक महीने बाद हरियाणा के शहरी इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग नजर आ रही है। सफाई कर्मचारियों की लंबी हड़ताल के कारण शहरों की सड़कों, गलियों और घरों के बाहर कचरे के ढेर जमा हो गए हैं।
हड़ताल के चौथे सप्ताह में पहुंचने के साथ ही यह संकट केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि सफाई कर्मचारियों की कार्य स्थितियों, रोजगार सुरक्षा और सरकार की संकट प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।चौथे सप्ताह में पहुंची हड़ताल से बढ़ी परेशानी
सफाई कर्मचारियों की लगातार जारी हड़ताल का असर हरियाणा के लगभग सभी प्रमुख शहरी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
सड़कों और गलियों के किनारे जमा कचरे ने शहरों की स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित किया है। इससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार की स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं तथा जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर भी उजागर हुआ है।
हड़ताल के दौरान कचरा उठाने के लिए तैनात की गई पुलिस समर्थित टीमों और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति भी देखने को मिली है।
हड़ताल ने मजदूरों के वेतन और सम्मान पर बहस तेज की
यह आंदोलन केवल कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है। हड़ताल ने श्रमिकों के सम्मान, वेतन, रोजगार की सुरक्षा और उनके कामकाजी हालात को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
सफाई कर्मचारी शहरों की रोजमर्रा की व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी नियुक्ति, वेतन और सेवा सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मौजूदा संकट ने यह मुद्दा और महत्वपूर्ण बना दिया है कि शहरों की सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों को किस तरह की नौकरी सुरक्षा और कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पूर्व IAS अधिकारी ने ठेका व्यवस्था पर उठाए सवाल
हिसार और मानेसर में नगर निगम आयुक्त के रूप में कार्य कर चुके पूर्व IAS अधिकारी अशोक गर्ग ने सफाई व्यवस्था की मौजूदा समस्या के लिए काफी हद तक ठेकेदार आधारित नियुक्ति प्रणाली को जिम्मेदार बताया।
उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को समाप्त करने पर विचार करने की अपील की।
अशोक गर्ग का तर्क है कि ठेकेदारों के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति ने शोषण, भ्रष्टाचार और सफाई सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा दिया है।
तीन श्रेणियों में काम कर रहे हैं सफाई कर्मचारी
पूर्व IAS अधिकारी अशोक गर्ग के अनुसार, हरियाणा के शहरी निकायों में सफाई कर्मचारी मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में कार्यरत हैं।
नियमित कर्मचारी
पहली श्रेणी में वे कर्मचारी आते हैं जो नियमित सरकारी या नगर निकाय सेवा में कार्यरत हैं और जिन्हें सेवा से जुड़े स्थायी लाभ मिलते हैं।
ULB पेरोल पर संविदा कर्मचारी
दूसरी श्रेणी में शहरी स्थानीय निकायों यानी Urban Local Bodies (ULBs) के पेरोल पर संविदा आधार पर कार्य करने वाले सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
निजी ठेकेदारों के माध्यम से तैनात कर्मचारी
तीसरी श्रेणी में वे कर्मचारी हैं जिन्हें निजी ठेकेदारों के माध्यम से सफाई कार्य के लिए नियुक्त किया जाता है।
गर्ग का मानना है कि अलग-अलग श्रेणियों में नियुक्ति और सेवा शर्तों के कारण कर्मचारियों के बीच रोजगार सुरक्षा और सुविधाओं में बड़ा अंतर पैदा होता है।
सफाई पर करोड़ों खर्च, फिर भी व्यवस्था पर सवाल
पूर्व IAS अधिकारी ने कहा कि हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय सफाई व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च करते हैं।
उनके अनुसार, गुरुग्राम नगर निगम सफाई व्यवस्था पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च करता है, जबकि फरीदाबाद के नगर निकाय का खर्च लगभग 598 करोड़ रुपये बताया गया है।
इतना बड़ा खर्च होने के बावजूद शहरों की मौजूदा सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय तक चली हड़ताल ने इस व्यवस्था की कमजोरियों को और स्पष्ट कर दिया है।
सभी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग
अशोक गर्ग ने सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन और रोजगार सुरक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को अपने परिवार और बच्चों की शिक्षा जैसी जिम्मेदारियों का भी सामना करना पड़ता है। कई कर्मचारी सुबह जल्दी काम पर पहुंच जाते हैं, जब उनके बच्चों को स्कूल की तैयारी की जरूरत होती है।
गर्ग ने सभी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की वकालत करते हुए कहा कि इससे उन्हें बेहतर रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सम्मान मिल सकेगा।
Key Highlights:
- PM नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद में ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की सराहना की थी।
- प्रधानमंत्री ने स्वच्छता को लोगों की आदत और संस्कृति का हिस्सा बनाने की बात कही थी।
- एक महीने बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहरों में कचरे के ढेर जमा हो गए।
- हड़ताल चौथे सप्ताह में पहुंच गई है।
- कई जगह प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और कचरा उठाने वाली टीमों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
- पूर्व IAS अधिकारी अशोक गर्ग ने ठेका आधारित नियुक्ति व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- सफाई कर्मचारियों को तीन प्रमुख श्रेणियों में नियुक्त किए जाने की बात सामने आई।
- गुरुग्राम नगर निगम के सफाई खर्च का आंकड़ा करीब 600 करोड़ रुपये बताया गया।
- फरीदाबाद नगर निकाय के सफाई खर्च का आंकड़ा करीब 598 करोड़ रुपये बताया गया।
- पूर्व IAS अधिकारी ने सभी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की वकालत की।
FAQ Section:
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की तारीफ कब की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद दौरे के दौरान इस पहल की सराहना की थी।
हरियाणा में सफाई व्यवस्था क्यों प्रभावित हुई है?
सफाई कर्मचारियों की लंबे समय से जारी हड़ताल के कारण कई शहरों में नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा सका, जिससे सड़कों और गलियों में कचरे के ढेर जमा हुए।
हड़ताल कितने समय से जारी है?
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुकी है।
पूर्व IAS अधिकारी अशोक गर्ग ने क्या सुझाव दिया?
उन्होंने ठेकेदार आधारित सफाई कर्मचारी नियुक्ति प्रणाली को समाप्त करने और सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन तथा सुरक्षित रोजगार देने की वकालत की।
सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग क्यों उठ रही है?
नियमितीकरण से कर्मचारियों को अधिक रोजगार सुरक्षा, बेहतर सेवा शर्तें और सामाजिक सम्मान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
Conclusion:
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने शहरी स्वच्छता व्यवस्था की मौजूदा चुनौतियों को सामने ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छता को जनसंस्कृति बनाने की अपील के कुछ ही सप्ताह बाद शहरों में कचरे का बढ़ता संकट इस बात पर सवाल खड़े कर रहा है कि सफाई व्यवस्था को संचालित करने वाले कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और रोजगार सुरक्षा को कितना मजबूत बनाया गया है। अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द समाधान निकलना शहरों की सफाई व्यवस्था और आम लोगों की परेशानी कम करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

