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V Kamaraja: जब पूर्व विधायक की गिरफ्तारी बनी थी बड़ी चुनौती, IPS अधिकारी ने ऐसे कराया था Bali Pahalwan का सरेंडर
2011 के विष्णु राम हत्याकांड में आरोपी रहे दो बार के पूर्व विधायक बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान ने तीन सप्ताह तक गिरफ्तारी से बचने के बाद तत्कालीन रोहतक रेंज IG V Kamaraja के सामने आत्मसमर्पण किया था।
हरियाणा के बहुचर्चित विष्णु राम हत्याकांड में दो बार के पूर्व विधायक बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को हाल ही में कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद रिटायर्ड IPS अधिकारी V Kamaraja फिर चर्चा में हैं। 2011 में उन्होंने तीन सप्ताह तक चले हाई-प्रोफाइल गतिरोध के बीच बाली पहलवान को आत्मसमर्पण के लिए राजी कराया था।
बाली पहलवान की सजा के बाद फिर चर्चा में V Kamaraja
हरियाणा के कलानौर के विष्णु राम हत्याकांड में दो बार के पूर्व विधायक बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद एक पुराने हाई-प्रोफाइल पुलिस ऑपरेशन की यादें फिर ताजा हो गई हैं।
इस मामले के समय तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ IPS अधिकारी V Kamaraja रोहतक रेंज के IG थे। हत्या वर्ष 2011 में हुई थी और बाली पहलवान इस मामले में आरोपियों में शामिल थे। पुलिस को उनकी तलाश थी, लेकिन वह गिरफ्तारी से बच रहे थे।
उस समय बाली पहलवान की गिरफ्तारी हरियाणा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी।तीन सप्ताह तक घर में डटे रहे थे बाली पहलवान
पुलिस से बचने के दौरान बाली पहलवान करीब तीन सप्ताह तक रोहतक के मोखरा गांव स्थित अपने घर में रहे।
उनके समर्थक और गांव के लोग लगातार घर के बाहर पहरा दे रहे थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। समर्थकों के पास लाठियां, दरांती और हथियार होने की बात सामने आई थी।
समर्थकों का दावा था कि बाली पहलवान को विष्णु राम हत्याकांड में गलत तरीके से फंसाया गया है। इसी कारण वे पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने से रोकने के लिए घर के आसपास निगरानी कर रहे थे।
पुलिस के लिए सीधे कार्रवाई करना था जोखिम भरा
लगातार पहरे और हथियारबंद समर्थकों की मौजूदगी के कारण पुलिस के लिए सीधे घर में प्रवेश कर बाली पहलवान को गिरफ्तार करना जोखिम भरा माना गया।
मामला इतना गंभीर हो गया था कि इस गतिरोध ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। वरिष्ठ हरियाणा पुलिस अधिकारियों ने रोहतक में डेरा डाल लिया था, ताकि पूर्व विधायक को जांच में शामिल कराया जा सके।
V Kamaraja ने अपनाई ‘Wait and Watch’ रणनीति
तत्कालीन IG V Kamaraja ने बाद में इस पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए बताया कि पुलिस पर बाली पहलवान को गिरफ्तार करने का काफी दबाव था।
हालांकि, उनके घर पर पुलिस टीम भेजना बेहद जोखिमपूर्ण माना गया क्योंकि बड़ी संख्या में हथियारबंद समर्थकों ने घर को घेर रखा था।
Kamaraja के अनुसार, ऐसी स्थिति में बल प्रयोग करने से पुलिस और समर्थकों के बीच हिंसक टकराव हो सकता था। इसलिए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय स्थिति पर नजर रखने की रणनीति अपनाई।
सूत्रों के जरिए बाली से संपर्क बनाए रखा
Kamaraja ने बताया कि उन्होंने अपने सूत्रों के माध्यम से बाली पहलवान से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने पूर्व विधायक को लगातार आत्मसमर्पण करने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में बाली इसके लिए तैयार नहीं हुए।
कई दौर की बातचीत के बाद बाली पहलवान ने तत्कालीन IG के सामने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने Kamaraja से गांव में अकेले और सादे कपड़ों में आकर उनसे मिलने को कहा।
Kamaraja इस मुलाकात के लिए तैयार थे, लेकिन उच्च अधिकारियों ने सुरक्षा जोखिम को देखते हुए उन्हें गांव जाने की अनुमति नहीं दी।
निष्पक्ष सुनवाई के भरोसे पर हुआ आत्मसमर्पण
लंबी बातचीत के बाद Kamaraja ने बाली पहलवान को भरोसा दिलाया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलेगा और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
इस भरोसे के बाद बाली पहलवान ने आखिरकार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
27 मई 2011 को रोहतक कार्यालय पहुंचे बाली
करीब तीन सप्ताह तक गिरफ्तारी से बचने के बाद बाली पहलवान 27 मई 2011 को अपने समर्थकों के साथ एक बड़े काफिले में रोहतक स्थित Kamaraja के कार्यालय पहुंचे।
वहीं उन्होंने तत्कालीन IG के सामने आत्मसमर्पण किया। इस तरह कई सप्ताह से चल रहा गतिरोध बिना किसी बड़े हिंसक टकराव के समाप्त हो गया।
Kamaraja के अनुसार, बाली को यह विश्वास दिलाना महत्वपूर्ण था कि कानून अपना काम करेगा और उन्हें मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
विष्णु राम हत्याकांड में अब सुनाई गई कठोर आजीवन कारावास की सजा
करीब 15 वर्ष पुराने इस मामले में हाल ही में दो बार के पूर्व विधायक बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
सजा के बाद 2011 का वह घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गया, जब उनकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और उनके समर्थकों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी।
उस समय Kamaraja द्वारा अपनाई गई रणनीति में सीधे बल प्रयोग के बजाय बातचीत और आत्मसमर्पण के लिए भरोसा कायम करने पर जोर दिया गया था।
Key Highlights:
- रिटायर्ड IPS अधिकारी V Kamaraja तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं।
- 2011 में वह रोहतक रेंज के IG के पद पर तैनात थे।
- विष्णु राम हत्याकांड में बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान पुलिस की तलाश में थे।
- बाली पहलवान करीब तीन सप्ताह तक मोखरा स्थित अपने घर में रहे।
- उनके समर्थक और ग्रामीण हथियारों के साथ घर के बाहर पहरा दे रहे थे।
- पुलिस ने संभावित हिंसक टकराव से बचने के लिए सीधे बल प्रयोग नहीं किया।
- Kamaraja ने सूत्रों के जरिए बाली से संपर्क बनाए रखा और आत्मसमर्पण के लिए समझाया।
- 27 मई 2011 को बाली पहलवान ने रोहतक में Kamaraja के कार्यालय में आत्मसमर्पण किया।
- हाल ही में विष्णु राम हत्याकांड में बाली पहलवान को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
FAQ Section:
V Kamaraja कौन हैं?
V Kamaraja एक रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं, जो 2011 में विष्णु राम हत्याकांड के दौरान रोहतक रेंज के IG के पद पर तैनात थे।
बाली पहलवान कौन हैं?
बलबीर सिंह उर्फ बाली पहलवान हरियाणा के दो बार के पूर्व विधायक हैं। वह विष्णु राम हत्याकांड के आरोपियों में शामिल थे।
बाली पहलवान ने पुलिस के सामने कब आत्मसमर्पण किया था?
बाली पहलवान ने 27 मई 2011 को रोहतक स्थित तत्कालीन IG V Kamaraja के कार्यालय में आत्मसमर्पण किया था।
बाली पहलवान करीब तीन सप्ताह तक कहां रहे?
गिरफ्तारी से बचने के दौरान बाली पहलवान रोहतक के मोखरा गांव स्थित अपने घर में करीब तीन सप्ताह तक रहे थे।
पुलिस ने बाली पहलवान को घर से सीधे गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
उनके घर के आसपास बड़ी संख्या में समर्थकों और ग्रामीणों के हथियारों के साथ मौजूद होने के कारण पुलिस को सीधे कार्रवाई में हिंसक टकराव का खतरा था। इसलिए बातचीत और आत्मसमर्पण का रास्ता अपनाया गया।
Conclusion:
विष्णु राम हत्याकांड में बाली पहलवान को मिली कठोर आजीवन कारावास की सजा ने 2011 के उस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम को फिर सुर्खियों में ला दिया है। उस समय रोहतक रेंज के IG रहे V Kamaraja के सामने पूर्व विधायक की गिरफ्तारी एक बड़ी चुनौती थी। हथियारबंद समर्थकों के बीच सीधे कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने बातचीत, संपर्क और भरोसे की रणनीति अपनाई। आखिरकार 27 मई 2011 को बाली पहलवान ने उनके कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया और कई सप्ताह से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ।
