विधानसभा विषय समिति ने पीजीआईएमएस रोहतक का किया निरीक्षण, स्टाफ की कमी और अव्यवस्थाओं पर जताई चिंता

नवनिर्मित भवन में सीलन, डॉक्टरों के पद खाली, दवाओं की उपलब्धता पर उठे सवाल

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हरियाणा विधानसभा की शिक्षा (तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, चिकित्सा) और स्वास्थ्य सेवाएं विषय समिति ने गुरुवार को पं. बीडी शर्मा पीजीआईएमएस, रोहतक का दौरा कर संस्थान की कार्यप्रणाली और सुविधाओं की समीक्षा की। समिति ने निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों पर अधिकारियों से जवाब तलब किया।

विधायक राम कुमार कश्यप की अध्यक्षता में हरियाणा विधानसभा विषय समिति ने गुरुवार को पं. बीडी शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति ने पीजीआईएमएस के अधिकारियों के साथ बैठक कर संस्थान से जुड़ी विभिन्न शिकायतों पर चर्चा की तथा ओपीडी ब्लॉक का दौरा कर मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत की।

बैठक के दौरान मेहम से कांग्रेस विधायक बलराम दांगी ने नवनिर्मित भवन में सीलन की समस्या का मुद्दा उठाया और कार्यकारी अभियंता से जवाब मांगा। दांगी ने कहा, “भवन अभी औपचारिक रूप से हैंडओवर भी नहीं हुआ है, लेकिन उसमें सीलन की शिकायत सामने आना गंभीर विषय है। अधिकारियों ने समस्या स्वीकार करते हुए शीघ्र सुधार का आश्वासन दिया है।”

समिति ने निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी भी पाई। सफाई कर्मचारियों ने भी अपर्याप्त जनशक्ति की शिकायत की। सदस्यों ने कहा कि संस्थान में स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई और शौचालयों की सफाई भी ठीक नहीं थी। समिति ने पीजीआईएमएस प्रशासन को इन खामियों को दूर करने के निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि पीजीआईएमएस में डॉक्टरों के 41 प्रतिशत से अधिक नियमित पद रिक्त हैं। संस्थान में स्वीकृत 1,018 ग्रुप-ए पदों में से 424 पद खाली हैं। प्रतिदिन हरियाणा और पड़ोसी राज्यों से 12 हजार से अधिक मरीज पीजीआईएमएस पहुंचते हैं, जिनमें से करीब 8 हजार ओपीडी सेवाएं लेते हैं, जबकि शेष ट्रॉमा सेंटर, मेडिकल इमरजेंसी और लेबर रूम में इलाज कराते हैं।

सूत्रों के अनुसार, समिति के एक सदस्य ने वेंटिलेटर की अनुपलब्धता का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि गंभीर मरीजों को समय पर वेंटिलेटर नहीं मिल पाते। इसके अलावा कैंसर उपचार के लिए आधुनिक मशीनों की उपलब्धता को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी मांगी गई।

ओपीडी निरीक्षण के दौरान मरीजों ने समिति को बताया कि अस्पताल की फार्मेसी में कई निर्धारित दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं, जिन्हें बाजार से खरीदना पड़ता है। इस पर समिति ने पीजीआईएमएस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंगल ने दावा किया कि ओपीडी में 90 प्रतिशत से अधिक दवाएं उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने कहा, “कुछ दवाएं जो कम उपयोग में आती हैं, नियमित स्टॉक में नहीं रखी जातीं, लेकिन मांग आने पर उन्हें तुरंत उपलब्ध करा दिया जाता है।”

डॉ. सिंगल ने बताया कि बैठक के दौरान समिति ने बजट, स्टाफ की स्थिति और अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी। उन्होंने कहा, “हमने समिति को स्टाफ की कमी और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बजट बढ़ाने की आवश्यकता से अवगत कराया। कुल मिलाकर समिति के साथ बैठक सकारात्मक और उपयोगी रही।”Screenshot_954

Edited By: Atul Sharma

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