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2.7 लाख अनुसूचित जाति छात्रों को अब भी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का इंतज़ार
मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद ₹271 करोड़ की राशि जारी नहीं, वित्त विभाग से मंज़ूरी लंबित
निजी शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत करीब 2.7 लाख अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों को अब तक पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है। एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में आयोजित कार्यक्रम में छात्रवृत्ति राशि जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन वित्त विभाग से राशि जारी न होने के कारण भुगतान अटका हुआ है।
निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे प्रदेश के लगभग 2.7 लाख अनुसूचित जाति छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दूसरी किस्त का अब भी इंतजार करना पड़ रहा है। करीब एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में आयोजित एक समारोह के दौरान ₹271 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि जारी करने की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम में जालंधर और आसपास के जिलों से करीब 10 हजार एससी छात्रों को आमंत्रित किया गया था।
इस कार्यक्रम का आयोजन गुरु रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर किया गया था और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 फरवरी को डेरा सचखंड बल्लां यात्रा से ठीक दो दिन पहले हुआ, जिससे इसकी राजनीतिक और सामाजिक अहमियत भी बढ़ गई थी।
सूत्रों के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने छात्रवृत्ति की राशि जारी करने के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अब तक राशि को स्वीकृति नहीं मिली है। यह राशि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अब तक नामांकित 2.7 लाख छात्रों को वितरित की जानी है।
यह छात्रवृत्ति की दूसरी किस्त है। इससे पहले करीब चार महीने पहले विभाग ने सरकारी स्कूलों में 10+2 कक्षा के 20 हजार छात्रों के लिए ₹40 करोड़ की राशि जारी की थी।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि छात्रवृत्ति राशि जारी करने का प्रस्ताव उसी दिन वित्त विभाग को भेज दिया गया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राशि जल्द, संभवतः अगले दिन जारी कर दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष एससी छात्रों का नामांकन 1.75 लाख से बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गया है। छात्रवृत्ति योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में फंडिंग की जाती है। इसमें ₹271 करोड़ राज्य सरकार का हिस्सा है, जबकि ₹350 करोड़ केंद्र सरकार द्वारा दिया जाना है।
अधिकारी ने बताया कि जैसे ही राज्य सरकार अपना हिस्सा पोर्टल पर जमा करती है, केंद्र सरकार अपनी राशि जारी कर देती है। इसके बाद पूरी छात्रवृत्ति राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे छात्रों को ट्रांसफर की जाती है।
छात्र संगठनों का कहना है कि छात्रवृत्ति में देरी से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और सरकार को इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।
