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हरियाणा की State Universities में 4 साल से खाली पदों पर संकट, ‘Deemed Abolished’ नियम के खिलाफ शिक्षकों ने खोला मोर्चा
चार साल तक नहीं भरे गए नए स्वीकृत पदों को समाप्त मानने के निर्देश से विश्वविद्यालयों में चिंता बढ़ी, HFUCTO ने 1 सितंबर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में धरने का ऐलान किया।
हरियाणा की राज्य विश्वविद्यालयों में चार साल से खाली नए स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ मानने के सरकारी निर्देश का शिक्षकों ने विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि पहले से ही गंभीर Faculty Shortage के बीच पद समाप्त करना उच्च शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेगा।
4 साल से खाली पदों पर सरकार का नया निर्देश
हरियाणा की राज्य विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षण पदों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार, Finance Department से मंजूरी मिलने की तारीख से चार साल तक यदि कोई नया स्वीकृत पद नहीं भरा जाता है या खाली रहता है, तो उसे ‘Deemed Abolished’ यानी समाप्त माना जा सकता है।
इस फैसले ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, अकादमिक जगत और सरकारी विश्वविद्यालयों में नियुक्ति की तैयारी कर रहे संभावित Faculty Candidates के बीच चिंता बढ़ा दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन विश्वविद्यालयों में वर्षों से बड़ी संख्या में Teaching Posts खाली हैं, उनका भविष्य क्या होगा।चार साल से अधिक पुरानी रिक्तियों पर Case-to-Case फैसला
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि चार साल से अधिक समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए Administrative Department मामले को Finance Department के समक्ष Case-to-Case आधार पर रखेगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से पहले से स्वीकृत पदों को भरने की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य विश्वविद्यालय पहले ही Faculty Shortage, बढ़ते छात्र नामांकन और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
Teachers Organisations ने जताया कड़ा विरोध
सरकारी निर्देश के खिलाफ राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
Haryana Federation of University and College Teachers Organisations (HFUCTO) ने इस फैसले के खिलाफ चरणबद्ध धरने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि स्वीकृत पदों को समाप्त करने से विश्वविद्यालयों के Academic और Administrative कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
1 सितंबर को Kurukshetra University में पहला धरना
HFUCTO अपने आंदोलन की शुरुआत 1 सितंबर से Kurukshetra University में धरने के साथ करेगा।
शिक्षक संगठन इस फैसले को वापस लेने और विश्वविद्यालयों में खाली पड़े स्वीकृत पदों को भरने की मांग कर रहे हैं।
MDU Teachers Association ने भी सरकार को घेरा
Maharshi Dayanand University Teachers’ Association (MDUTA) ने भी सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है।
संगठन का कहना है कि खाली पदों को भरने के बजाय पहले से स्वीकृत पदों को समाप्त करने की दिशा में बढ़ना विश्वविद्यालयों की Academic व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
MDUTA के अध्यक्ष प्रदीप गहलोत ने बताया कि Maharshi Dayanand University (MDU), Rohtak में वर्ष 2017 में 31 पदों पर नियमित नियुक्तियां हुई थीं। इसके बाद इस वर्ष 11 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन तकनीकी कारणों से चयनित उम्मीदवारों को अभी तक वेतन नहीं मिल पाया है।
MDU में बड़ी संख्या में Faculty Posts खाली
प्रदीप गहलोत के अनुसार, MDU में वर्तमान में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। पिछले करीब नौ वर्षों में कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे विश्वविद्यालय में Faculty Shortage गंभीर हो गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी बनी हुई है।
गहलोत के मुताबिक, MDU के कई विभागों का संचालन फिलहाल Temporary Arrangements के जरिए किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए Contractual Teachers की नियुक्ति की जा रही है और सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी दोबारा जिम्मेदारी दी जा रही है।
Temporary व्यवस्था से Academic Quality पर असर का दावा
MDUTA अध्यक्ष ने कहा कि अस्थायी व्यवस्थाओं का असर केवल नियमित पढ़ाई तक सीमित नहीं है। इससे Academic Standards, Research और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों में स्थायी Faculty की कमी लंबे समय में छात्रों की शिक्षा और Research Environment दोनों को कमजोर कर सकती है।
Non-Teaching Posts भी बड़ी संख्या में खाली
गहलोत ने बताया कि MDU में समस्या केवल Teaching Posts तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में Non-Teaching Positions भी रिक्त हैं।
इन पदों की कमी के कारण Administrative Work भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कामकाज चलाने के लिए सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा लगाया जा रहा है, जबकि Consultants को Contractual Basis पर नियुक्त किया गया है।
शिक्षकों ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की चेतावनी दी
MDUTA अध्यक्ष प्रदीप गहलोत ने कहा कि शिक्षक संगठन राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से करेंगे।
उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालयों की Academic व्यवस्था और मानकों की रक्षा करना तथा छात्रों के बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करना है।
शिक्षक संगठनों की मांग है कि पहले से स्वीकृत और लंबे समय से खाली पड़े पदों को समाप्त करने के बजाय उन्हें जल्द से जल्द भरा जाए।
Key Highlights:
- हरियाणा की राज्य विश्वविद्यालयों में 4 साल से खाली नए स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ माना जा सकता है।
- चार साल से अधिक पुरानी रिक्तियों को भरने का मामला Finance Department के पास Case-to-Case आधार पर भेजा जाएगा।
- शिक्षक संगठनों ने सरकारी निर्देश का विरोध शुरू कर दिया है।
- HFUCTO 1 सितंबर से Kurukshetra University में धरना शुरू करेगा।
- MDUTA ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की है।
- MDU में 2017 में 31 पदों पर नियमित नियुक्तियां हुई थीं।
- इस वर्ष 11 पदों पर भर्ती हुई, लेकिन चयनित उम्मीदवारों को तकनीकी कारणों से अभी वेतन नहीं मिला है।
- MDU में कई विभाग Temporary Arrangements के सहारे चल रहे हैं।
- Contractual Teachers और Retired Faculty की मदद से Faculty Shortage को पूरा किया जा रहा है।
- Non-Teaching Posts की कमी से Administrative Work भी प्रभावित होने का दावा किया गया है।
FAQ Section:
हरियाणा में चार साल से खाली पदों को लेकर क्या नया निर्देश जारी हुआ है?
निर्देश के अनुसार, Finance Department से मंजूरी मिलने के बाद चार साल तक नहीं भरे गए नए स्वीकृत पदों को ‘Deemed Abolished’ माना जा सकता है।
चार साल से ज्यादा समय से खाली पदों को कैसे भरा जाएगा?
ऐसे पदों को भरने का मामला Administrative Department द्वारा Finance Department के सामने Case-to-Case आधार पर रखा जाएगा।
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का विरोध क्यों किया है?
शिक्षकों का कहना है कि राज्य विश्वविद्यालयों में पहले से ही Faculty Shortage है। ऐसे में स्वीकृत पदों को समाप्त करने से शिक्षा, Research और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
HFUCTO का आंदोलन कब शुरू होगा?
HFUCTO अपने आंदोलन की शुरुआत 1 सितंबर को Kurukshetra University में धरने से करेगा।
MDU में Faculty Shortage की क्या स्थिति है?
MDUTA के अनुसार, MDU में बड़ी संख्या में Teaching Posts खाली हैं और पिछले नौ वर्षों में कई शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं। कई विभाग Temporary Arrangements के जरिए संचालित किए जा रहे हैं।
Conclusion:
हरियाणा की राज्य विश्वविद्यालयों में चार साल से खाली स्वीकृत पदों को समाप्त मानने के निर्देश ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार पदों और वित्तीय स्वीकृतियों को लेकर व्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, वहीं शिक्षक संगठन पहले से मौजूद Faculty Shortage के बीच पद समाप्त करने को छात्रों और विश्वविद्यालयों के हित में नहीं मान रहे हैं। अब 1 सितंबर से शुरू होने वाला HFUCTO का आंदोलन इस विवाद को और तेज कर सकता है।
