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हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण समिति ने यमुनानगर में कचरा व सीवेज प्रबंधन कार्यों का लिया जायजा
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, पुराने हामिदा हेड और 77 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण
हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण विषयक समिति ने यमुनानगर जिले में कचरा प्रबंधन, सीवेज उपचार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण विषयक समिति ने शनिवार को यमुनानगर जिले में विभिन्न परियोजनाओं और स्थलों का निरीक्षण कर कचरा प्रबंधन, सीवेज तथा औद्योगिक अपशिष्ट निस्तारण की स्थिति का जायजा लिया।
समिति के अध्यक्ष एवं कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में समिति के सदस्यों—यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, जगाधरी विधायक अकरम खान और इंद्री (करनाल) विधायक राम कुमार कश्यप—ने सबसे पहले कैल गांव स्थित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र का निरीक्षण किया। यहां कचरे के पृथक्करण, प्रसंस्करण और निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
इस दौरान अतिरिक्त नगर आयुक्त धीरज कुमार, कार्यकारी अभियंता नरेंद्र सुहाग और सहायक अभियंता राकेश जुनेजा ने संयंत्र में प्रस्तावित आधारभूत ढांचे के उन्नयन, जैसे शेड निर्माण और कंक्रीट फर्श बिछाने की जानकारी दी। समिति ने अधिकारियों को साफ-सफाई, मशीनरी के उचित रखरखाव और पर्यावरण मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद समिति ने ओल्ड हामिदा हेड का निरीक्षण कर वहां से गुजरने वाले पानी की स्थिति और संभावित प्रदूषण स्रोतों पर चर्चा की। विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने समिति को बताया कि इस स्थल पर 6.14 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य पार्क विकसित किया जाएगा। समिति ने पॉलीथीन पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया और बस स्टैंड व रेलवे स्टेशनों पर रिवर्स वेंडिंग मशीनें लगाने पर भी विचार-विमर्श किया, ताकि लोग खाली बोतलें और पॉलीथीन डालकर प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकें।
समिति ने अंत में जम्मू कॉलोनी में निर्माणाधीन 77 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति, तकनीकी ढांचे और प्रस्तावित संचालन प्रणाली की जानकारी दी। अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह यादव ने कहा कि यह परियोजना शहर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके चालू होने से सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार होगा और यमुना नहर को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी।
