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एमडीयू के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग
हरियाणा सरकार की तर्ज पर पेंशनरों को कैशलेस इलाज देने की अपील, वीसी को ज्ञापन
महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हरियाणा सरकार की योजना की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग की है। रिटायर्ड एम्प्लॉयीज कल्याण समिति ने इसे पेंशनरों के हित में अत्यंत आवश्यक बताते हुए कुलपति को पत्र लिखा है।
महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि सभी पेंशनरों के लिए निजी अस्पतालों में कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट सुविधा शुरू की जाए। इस संबंध में रिटायर्ड एम्प्लॉयीज कल्याण समिति ने कुलपति को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।
समिति के अध्यक्ष दयानंद छिक्कारा ने बताया कि वर्तमान में एमडीयू में 2,000 से अधिक गैर-शिक्षण सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और सभी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि विश्वविद्यालय चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति करता है, लेकिन इसमें काफी समय लग जाता है, जबकि निजी अस्पताल इलाज से पहले अग्रिम भुगतान की मांग करते हैं। ऐसे में कई सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक व्यवस्था नहीं कर पाते, जिससे कैशलेस इलाज उनकी मजबूरी बन गया है।
छिक्कारा ने कहा कि जब हरियाणा सरकार अपने कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दे सकती है, तो वही सुविधा एमडीयू के पेंशनरों को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बैठक में भी विस्तार से उठाया गया।
बैठक में सदस्यों ने कहा कि राज्य स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी इससे वंचित हैं। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में उचित व्यवस्था करने की मांग की और सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सभी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा।
इसके अलावा, बैठक में छठे वेतन आयोग के तहत बकाया एरियर जारी न होने पर भी चिंता जताई गई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अब तक लंबित भुगतान नहीं मिला है। समिति ने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया कि इस मामले को हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के समक्ष उठाकर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए।
