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जालंधर में तेजी से बढ़ रहा शतरंज का क्रेज, युवा खिलाड़ियों की नई पीढ़ी उभर रही
स्कूलों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक शतरंज में बढ़ी भागीदारी, स्थानीय खिलाड़ियों ने दिलाई पहचान
जालंधर में शतरंज (Chess) अब सिर्फ एक इनडोर खेल नहीं रहा, बल्कि तेजी से लोकप्रिय प्रतिस्पर्धी खेल बन गया है। स्कूलों, अकादमियों और जिला स्तर के टूर्नामेंटों में बच्चों और किशोरों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
जालंधर में “राजाओं का खेल” यानी शतरंज अब धीरे-धीरे युवाओं का खेल बनता जा रहा है। स्कूलों के गलियारों से लेकर कोचिंग अकादमियों, जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों तक, शहर में शतरंज की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
जो खेल पहले केवल एक इनडोर शौक माना जाता था, वह अब एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में विकसित हो गया है, जिसमें सैकड़ों बच्चे और किशोर हिस्सा ले रहे हैं। कोचों और आयोजकों के अनुसार, भारतीय शतरंज सितारों जैसे गुकेश डोमराजू और विश्वनाथन आनंद की सफलता ने जालंधर के युवाओं को इस खेल को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
शहर की बढ़ती शतरंज संस्कृति को सबसे बड़ा बढ़ावा स्थानीय खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों से मिला है। हाल ही में नमितबीर सिंह वालिया ने फ्रांस में आयोजित 3rd Annemasse International Masters Tournament में चौथा स्थान हासिल कर पंजाब को गौरवान्वित किया और राज्य के दूसरे इंटरनेशनल मास्टर (IM) बने।नमितबीर की इस उपलब्धि से शहर के उभरते शतरंज खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा है। कोचों का कहना है कि अब माता-पिता भी अपने बच्चों को शतरंज अकादमियों में दाखिल कराने के लिए आगे आ रहे हैं, क्योंकि वे इसे बुद्धिमत्ता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी अवसरों से जुड़ा खेल मानते हैं।
नमितबीर से पहले दुष्यंत शर्मा ने पंजाब के लिए इतिहास रचा था। 1 फरवरी 2022 को वे राज्य के पहले इंटरनेशनल मास्टर बने थे, जब उन्होंने 2400 FIDE रेटिंग का आंकड़ा पार किया था। खास बात यह है कि दोनों ही इंटरनेशनल मास्टर जालंधर से हैं, जो शहर को पंजाब के प्रमुख शतरंज केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
पिछले कुछ वर्षों में शहर में शतरंज टूर्नामेंटों और भागीदारी में भी तेज वृद्धि हुई है। DAV Institute of Engineering and Technology में आयोजित Finnov8 Capital Open Chess Tournament में लगभग 220 खिलाड़ियों ने भाग लिया था, जिसमें 25 से अधिक शहरों के खिलाड़ी शामिल थे।
स्कूल स्तर पर भी प्रतियोगिताएं बड़ी संख्या में बच्चों को आकर्षित कर रही हैं। दिल्ली पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित जिला स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में लगभग 180 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसमें अंडर-7, अंडर-9, अंडर-13 और अंडर-17 श्रेणियां शामिल थीं, जिनमें अंडर-7 वर्ग के विजेता किंडरगार्टन के बच्चे थे।
स्थानीय खिलाड़ियों जैसे उत्कृष्ट तुली और श्रेयांश जैन ने हाल ही में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया है।
शतरंज कोचों का मानना है कि अब शहर में ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है, जो भविष्य में और मजबूत राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर सकता है।

