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अमृतसर में सोने की ज्वेलरी की बिक्री में भारी गिरावट, दुकानों पर 50% तक कम हुआ ग्राहक प्रवाह
प्रधानमंत्री के ‘मितव्ययिता’ आह्वान और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में सुस्ती, ज्वेलर्स ने जताई चिंता
अमृतसर में सोने की ज्वेलरी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ में पिछले दो दिनों में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। ज्वेलर्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययिता और गैर-जरूरी खर्च घटाने के आह्वान के बाद उपभोक्ता खरीदारी को लेकर ‘वेट एंड वॉच’ मोड में चले गए हैं।
अमृतसर में सोने की ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही में तेज गिरावट देखी गई है। ज्वेलर्स का कहना है कि पिछले दो दिनों में फुटफॉल लगभग 50 प्रतिशत तक घट गया है। यह स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान के बाद बनी है जिसमें उन्होंने मितव्ययिता अपनाने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की थी।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि यह गिरावट पूरी तरह से ‘सेंटिमेंट-ड्रिवन’ है और ग्राहकों ने खरीदारी को फिलहाल रोकते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति अपना ली है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी आर्थिक परिस्थितियों के बीच नागरिकों से एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की सलाह दी थी।
प्रमुख ज्वेलर पंकज खुराना ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस आह्वान का उपभोक्ता व्यवहार पर “काफी असर” पड़ा है। उन्होंने बताया कि सप्ताह की शुरुआत में शादी-विवाह से जुड़ी कुछ खरीदारी हुई थी, लेकिन उसके बाद बाजार में मांग काफी कमजोर हो गई है।उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने शादी के लिए खरीदारी की योजना बनाई थी, वे शुरू में आए थे, लेकिन उसके बाद बाजार शांत हो गया है। ग्राहक अब अनिश्चित हैं और स्थिति को देखकर आगे निर्णय लेना चाहते हैं।”
खुराना ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य भले ही मितव्ययिता को बढ़ावा देना हो, लेकिन इस कदम से ज्वेलरी व्यापार पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह क्षेत्र कारीगरों, श्रमिकों और खुदरा व्यापारियों की बड़ी संख्या को रोजगार देता है।
अमृतसर उत्तर भारत के प्रमुख सोना आभूषण निर्माण और व्यापार केंद्रों में से एक है, जहां हजारों लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं।
सिविल लाइंस ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मेहता ने कहा कि नकारात्मक भावना ने व्यापार को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने हाल के नीतिगत बदलावों की ओर भी इशारा किया, जिनमें सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने की रिपोर्ट शामिल है, जिससे कीमतों में लगभग 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते शुल्क और कमजोर मांग का मिलाजुला असर उत्पादन इकाइयों और रिटेल स्टोर्स पर “गंभीर रूप से नुकसानदायक” हो सकता है।

