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चहेरू ब्रिज की जर्जर हालत पर NHAI में शिकायत, सामाजिक कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास ने उठाई सुरक्षा की मांग
NH-44 पर खतरनाक स्थिति को लेकर प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, तुरंत मरम्मत और सुरक्षा सुधार की मांग
जालंधर के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास ने NH-44 पर स्थित चहेरू ब्रिज की खराब हालत को लेकर NHAI सहित कई अधिकारियों को शिकायत दी है। उन्होंने इसे यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तुरंत सुरक्षा सुधार की मांग की है।
शहर की सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता तेजस्वी मिन्हास ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) में NH-44 (पूर्व NH-1) पर स्थित चहेरू ब्रिज की उपेक्षित स्थिति को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
मिन्हास ने इस पुल की मौजूदा स्थिति को हजारों दैनिक यात्रियों के लिए “तत्काल खतरा” बताया है और कहा कि देश के सबसे व्यस्त हाईवे कॉरिडोर में से एक पर सुरक्षा ढांचे की भारी कमी है, जो दिल्ली, पंजाब, जम्मू और अमृतसर को जोड़ता है।
शिकायत के अनुसार, पुल के कई हिस्सों में वर्षों से पर्याप्त साइड क्रैश बैरियर, गार्ड रेल और पैरापेट सुरक्षा जैसी जरूरी संरचनाएं मौजूद नहीं हैं, जबकि यह एक तेज रफ्तार और भारी ट्रैफिक वाले दुर्घटना-प्रवण मार्ग पर स्थित है।NHAI के अलावा यह शिकायत पंजाब के मुख्यमंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त और जालंधर नगर निगम को भी भेजी गई है।
मिन्हास ने अधिकारियों की “आधा-अधूरा” सुरक्षा उपायों की आलोचना करते हुए कहा कि पुल पर कई स्थानों पर केवल प्लास्टिक ट्रैफिक पोस्ट लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “ये केवल दृश्य संकेतक हैं, ये किसी कार, बस, ट्रक या दोपहिया वाहन को नीचे गिरने से रोकने में पूरी तरह असमर्थ हैं।”
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मौजूदा स्थिति मोटर व्हीकल एक्ट, भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) सुरक्षा मानकों, MoRTH की पुल सुरक्षा गाइडलाइंस और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन की सुरक्षा का अधिकार) का उल्लंघन है।
मिन्हास ने प्रशासन से कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे हैं— जैसे वर्षों से स्थायी मरम्मत क्यों नहीं हुई, क्या नियमित संरचनात्मक निरीक्षण किए गए, कौन सी एजेंसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार है, और पूर्व में दी गई सुरक्षा चेतावनियों को क्यों नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने मांग की है कि पुल का तुरंत पुनर्निर्माण और सुधार किया जाए, जिसमें मजबूत क्रैश बैरियर, साइड रेलिंग, खतरे के संकेत, उचित रोशनी और गति नियंत्रण उपाय शामिल हों।


