लोकसभा में मंगलवार को उस समय भारी हंगामा हुआ, जब विपक्षी सदस्यों ने कथित तौर पर कागज़ फाड़कर आसन की ओर फेंक दिए। इस पर कार्यवाही करते हुए आसन पर बैठे दिलीप सैकिया ने कांग्रेस के सात और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक सांसद को नामित किया।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसमें इन आठों सांसदों को 2 अप्रैल को समाप्त होने वाले बजट सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित करने की मांग की गई। सदन ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
निलंबित किए गए सांसदों में कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, सी. किरण कुमार रेड्डी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, मणिकम टैगोर, प्रशांत पाडोले और डीन कुरियाकोस, जबकि माकपा के एस. वेंकटेसन शामिल हैं।
प्रस्ताव पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि इन सदस्यों ने सदन और आसन की गरिमा की पूरी तरह अवहेलना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों ने कागज़ फाड़े और आसन की ओर फेंके, जिसके चलते उन्हें आसन द्वारा नामित किया गया।
इस कार्रवाई से सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और गहरा गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 2020 के भारत–चीन संघर्ष पर पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े लेख का हवाला देने की अनुमति नहीं दी गई।
इसके अलावा विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत–अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा और वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर कथित तोड़फोड़ अभियान को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन निलंबनों के बाद संसद के भीतर और बाहर सरकार–विपक्ष के बीच टकराव और तीखा होने की संभावना है।

