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लोकसभा सीटों के परिसीमन पर बड़ा बदलाव संभव, उत्तर राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है
2011 जनगणना के आधार पर नई गणना, पंजाब-हरियाणा को मिल सकता है फायदा
सरकार के प्रस्तावित परिसीमन प्लान के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती है, जिससे उत्तर भारत के राज्यों में सीटों में बढ़ोतरी संभव है।
सरकार की प्रस्तावित परिसीमन योजना—जो लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के जल्द लागू होने से जुड़ी है—की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन मसौदा विधेयकों के प्रारंभिक अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि राज्यों के बीच सीटों का बंटवारा कैसे बदल सकता है।
‘द ट्रिब्यून’ ने इस संभावित बदलाव का विश्लेषण किया, खासकर उत्तर भारत के राज्यों—पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर—पर इसके प्रभाव को समझने के लिए।
यह विश्लेषण मसौदे के प्रारंभिक अध्ययन पर आधारित है, जिसमें संकेत दिया गया है कि सीटों का पुनर्निर्धारण (रीएडजस्टमेंट) 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, न कि अनुपातिक प्रणाली (जहां राज्यों का सीट प्रतिशत स्थिर रहता है) के आधार पर।
नई लोकसभा में सीटों की गणना कैसे होगी:
सरकारी विधेयक में दो मुख्य प्रस्ताव दिए गए हैं:
- परिसीमन (लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण) 2026 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि नई जनगणना पूरी होने में समय लगेगा।
- लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी।
प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, सीटों का बंटवारा जनसंख्या आधारित होगा।
गणना का तरीका इस प्रकार होगा:
भारत की 2011 की कुल जनसंख्या (करीब 1.2 अरब) को 850 सीटों से विभाजित किया जाएगा। इससे प्रति सीट लगभग 14 लाख लोगों का मान निकलेगा। इसके बाद प्रत्येक राज्य की जनसंख्या को 14 लाख से विभाजित कर यह तय किया जाएगा कि उसे कितनी सीटें मिलेंगी।
इस तरीके से राज्यों के सीटों का प्रतिशत हिस्सा बदल जाएगा, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि राज्यों का प्रतिशत प्रतिनिधित्व वर्तमान लोकसभा की तरह ही रहना चाहिए।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में संभावित बदलाव:
पंजाब:
2011 में जनसंख्या लगभग 2.7 करोड़ थी। इस फॉर्मूले के अनुसार, पंजाब की सीटें 13 से बढ़कर 19 हो सकती हैं। हालांकि, कुल हिस्सेदारी 2.4% से घटकर 2.1% रह जाएगी।
अगर अनुपातिक प्रणाली लागू होती, तो पंजाब को करीब 20 सीटें मिलतीं।
हिमाचल प्रदेश:
करीब 68.6 लाख की जनसंख्या के आधार पर राज्य को लगभग 5 सीटें मिल सकती हैं (वर्तमान में 4 सीटें हैं)।
अनुपातिक प्रणाली में यह संख्या 6 हो सकती थी।
हरियाणा:
वर्तमान में 10 सीटें हैं। 2.53 करोड़ की जनसंख्या के आधार पर यह संख्या बढ़कर 18 हो सकती है, यानी 8 सीटों का इजाफा।
इससे राज्य की हिस्सेदारी 1.8% से बढ़कर 2.1% हो जाएगी।
अनुपातिक प्रणाली में हरियाणा को 18 के बजाय लगभग 16 सीटें मिलतीं।
इस तरह, प्रस्तावित परिसीमन योजना से कुल सीटें तो बढ़ेंगी, लेकिन राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बदल सकता है, जो राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

