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नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक कदम: सुमन सैनी
करनाल में पदयात्रा के दौरान बोलीं—महिलाओं को मिलेगा 33% राजनीतिक आरक्षण
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक और सशक्तिकरण का बड़ा कदम बताया।
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पत्नी सुमन सैनी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
बुधवार को करनाल में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन पदयात्रा’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और उज्जवल भविष्य का एक आंदोलन है।
पदयात्रा की शुरुआत माया लॉन रघुनाथ नागा से हुई, जहां सुमन सैनी ने दीप प्रज्वलित किया और भारत माता को पुष्प अर्पित किए। इसके बाद पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई गई। यह यात्रा गांधी चौक, सदर बाजार, जवाहर मार्केट, नॉवेल्टी चौक, दयालपुरा गेट, करन गेट होते हुए पुरानी सब्जी मंडी के पास समाप्त हुई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस अधिनियम ने महिलाओं को केवल योजनाओं के लाभार्थी से आगे बढ़ाकर नीति निर्धारक बनने का अवसर दिया है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने राज्य में महिला केंद्रित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
सुमन सैनी ने सावित्रीबाई फुले, पंडिता रमाबाई, रानी लक्ष्मीबाई और कल्पना चावला जैसी महान महिलाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संघर्ष और उपलब्धियां आज भी महिलाओं को आगे बढ़ने और बाधाओं को तोड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
उन्होंने बताया कि आज देश में करीब 14.5 लाख महिलाएं पंचायतों में कार्यरत हैं, जो कुल प्रतिनिधियों का 46 प्रतिशत हैं। इसके अलावा, जन धन योजना, मुद्रा लोन और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और अब उन्हें राजनीति में भी समान भागीदारी मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम की संयोजक और मेयर रेणु बाला गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं के सपनों को पूरा करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर देगा।

