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फतेहपुर में चोटी नदी के पुनर्जीवन की पहल, पर्यावरण संरक्षण की ओर बड़ा कदम
प्रयागराज मंडल की योजना, 11.5 किमी लंबी नदी को फिर से जीवित करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में लगभग विलुप्त हो चुकी चोटी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक योजना शुरू की गई है, जिससे पर्यावरण और जल संसाधनों को लाभ मिलेगा।
पर्यावरणीय पुनर्स्थापन की दिशा में एक नई पहल के तहत प्रयागराज मंडल ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में लगभग विलुप्त हो चुकी चोटी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक योजना शुरू की है। यह इस क्षेत्र में इस तरह की आठवीं नदी पुनर्जीवन परियोजना होगी।
फतेहपुर जिले की 11.5 किलोमीटर लंबी चोटी नदी, जो कभी 11 ग्राम पंचायतों के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा थी, अब वर्षों की उपेक्षा और पर्यावरणीय क्षरण के कारण एक मौसमी धारा बनकर रह गई है। इसके प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह नदी मलवां विकासखंड के ग्राम पंचायत दिघ से निकलती है और खजुहा ब्लॉक के सिकंदरपुर तथा तेलियानी ब्लॉक के असवर तारापुर से होते हुए ठिठुरा के पास एक झील में जाकर मिलती है। यह झील ससुर खदेरी नदी के उद्गम से जुड़ी हुई है। कुल मिलाकर, यह नदी मलवां की 5, खजुहा की 3 और तेलियानी की 3 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है।
इस पहल की पुष्टि करते हुए प्रयागराज मंडल की आयुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार सूखती नदियों को बारहमासी (perennial) बनाने के संकल्प के तहत चोटी नदी का चयन सर्वसम्मति से किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक बैठकों के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
एक समय फतेहपुर जिला ससुर खदेरी, रिंद, पांडु, बारी, चोटी और नून जैसी कई नदियों से समृद्ध था, लेकिन अब इनमें से अधिकांश नदियां मौसमी बन चुकी हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। इससे पर्यावरण, कृषि, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
अधिकारियों ने बताया कि इस पुनर्जीवन योजना में प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ जन भागीदारी को भी शामिल किया जाएगा, ताकि स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। नमामि गंगे और ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग को इस परियोजना के नोडल एजेंसियों के रूप में नामित किया गया है।

