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टाटा ग्रुप का बड़ा लक्ष्य: 5 साल में 20 लाख वाहन उत्पादन, लखनऊ में बनेंगे हाइड्रोजन बस-ट्रक
10 लाखवें वाहन के साथ नई उपलब्धि, यूपी में निवेश और रोजगार बढ़ाने की योजना
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने लखनऊ प्लांट से 10 लाखवां वाहन निकलने के बाद अगले 5 वर्षों में 20 लाख वाहन बनाने और हाइड्रोजन वाहनों के निर्माण की घोषणा की।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को कहा कि कंपनी अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहन (2 मिलियन) बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है और लखनऊ स्थित अपनी फैक्ट्री में हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और ट्रकों का निर्माण भी करने की योजना बना रही है। यह घोषणा लखनऊ प्लांट से 10 लाखवें वाहन के रोलआउट के बाद की गई।
यह ऐतिहासिक वाहन एक शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) इलेक्ट्रिक बस है, जो उत्तर प्रदेश के 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य और कंपनी के 2045 तक नेट-जीरो लक्ष्य के अनुरूप है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने बताया कि 10 लाख वाहनों का आंकड़ा हासिल करने में 34 साल लगे, लेकिन अब कंपनी अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों का उत्पादन करने का लक्ष्य हासिल कर सकती है।
उन्होंने कहा, “आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में टाटा ग्रुप की मौजूदगी दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। अनुकूल निवेश माहौल, बेहतर बुनियादी ढांचा और मजबूत नेतृत्व के कारण औद्योगिक विस्तार के लिए यहां अपार संभावनाएं हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ेगी और इस विकास में उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका होगी।
चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा मोटर्स का पोर्टफोलियो तेजी से विस्तार कर रहा है, जिसमें पारंपरिक डीजल वाहनों के साथ-साथ CNG, इलेक्ट्रिक और भविष्य में हाइड्रोजन आधारित वाहन भी शामिल होंगे।
टाटा ग्रुप की भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में वर्तमान में लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में लगभग 20,000 पेशेवर कार्यरत हैं, जिनकी संख्या अगले पांच वर्षों में बढ़कर 40,000 तक पहुंच सकती है।
इसके अलावा, समूह बिजली, रक्षा, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि टाटा ग्रुप केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। समूह जल संरक्षण, कौशल विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मथुरा में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और गोरखपुर में एआई टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना पर भी काम किया जा रहा है।
