कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में ₹22 करोड़ से अधिक के निवेश से बनेगा रिसर्च सेंटर, नई तकनीकों पर होगा शोध

कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने किया मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर (MC²) का उद्घाटन; भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री और इंजीनियरिंग सहित कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ।

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हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने शोध और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर (MC²) की शुरुआत की गई है। केंद्र के लिए विश्वविद्यालय ने लगभग ₹11.67 करोड़ का योगदान दिया है, जबकि ANRF PAIR ग्रांट के तहत करीब ₹10.5 करोड़ मिले हैं। यहां आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से विभिन्न विषयों में शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने अपने शोध बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर (Materials Characterisation Centre यानी MC²) का उद्घाटन बुधवार को कुलपति प्रोफेसर सोम नाथ सचदेवा ने किया।

इस केंद्र का उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगात्मक सुविधाओं के माध्यम से शोध कार्यों को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह केंद्र नवीन सामग्रियों के विकास, तकनीकी समाधान तैयार करने और उच्च गुणवत्ता वाले शोध परिणाम हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कुलपति ने शोध सुविधाओं को मजबूत करने पर दिया जोर

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सोम नाथ सचदेवा ने भौतिकी विभाग को नए केंद्र की स्थापना के लिए बधाई दी। उन्होंने इस सुविधा को विकसित करने में शामिल टीम के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि MC² भविष्य में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है, जहां नवीन सामग्रियों, तकनीकी समाधानों और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान पर काम किया जाएगा।

कुलपति के अनुसार, इस केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत पर्याप्त वित्तीय निवेश के जरिए शोध सुविधाओं और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

₹22 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता

MC² के प्रभारी प्रोफेसर सुमन महेंदिया ने केंद्र के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी दी।

उनके अनुसार, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने इस पहल के लिए लगभग ₹11.67 करोड़ का योगदान दिया है। इसके अलावा, ANRF PAIR ग्रांट के तहत करीब ₹10.5 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।

इन दोनों राशियों को मिलाकर केंद्र के लिए लगभग ₹22.17 करोड़ का वित्तीय योगदान बनता है।

विश्वविद्यालय के शोध तंत्र को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज (NMHS) से मिली वित्तीय सहायता से भी मजबूती मिली है।

कई विषयों में संयुक्त शोध को मिलेगा बढ़ावा

मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर को विभिन्न शैक्षणिक विषयों के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है।

यह केंद्र भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और पर्यावरण अध्ययन जैसे क्षेत्रों में अंतरविषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।

अंतरविषयक शोध में अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ मिलकर किसी समस्या का अध्ययन करते हैं और उसके समाधान तलाशते हैं। इस तरह की व्यवस्था वैज्ञानिक प्रयोगों, नई सामग्रियों के विश्लेषण और तकनीकी विकास के लिए उपयोगी हो सकती है।

आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से लैस होगा केंद्र

केंद्र में विभिन्न प्रकार के आधुनिक विश्लेषणात्मक और प्रयोगात्मक उपकरण लगाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (GC-MS): नमूनों में मौजूद रासायनिक घटकों की पहचान और विश्लेषण के लिए उपयोगी तकनीक।

  • BET सरफेस एरिया एनालाइजर: सामग्रियों के सतही क्षेत्रफल और उनसे जुड़ी विशेषताओं का अध्ययन करने में सहायक उपकरण।

  • इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन: इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं और सामग्रियों के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए।

  • बैटरी टेस्टर: बैटरियों के प्रदर्शन और संबंधित विशेषताओं की जांच के लिए उपयोगी उपकरण।

  • उच्च तापमान पर प्रयोग करने वाले उपकरण: केंद्र में उच्च तापमान से संबंधित प्रयोगात्मक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

इन सुविधाओं से शोधकर्ताओं को सामग्रियों के गुणों का विश्लेषण करने और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विश्वविद्यालय के शोध तंत्र को मजबूत करने की पहल

MC² की स्थापना कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय की वित्तीय भागीदारी और बाहरी अनुदान के सहयोग से विकसित यह केंद्र विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को आधुनिक उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा।

केंद्र की सुविधाओं का उपयोग किस स्तर पर और किन परियोजनाओं के लिए किया जाएगा, इसका वास्तविक प्रभाव इसके संचालन और शोध गतिविधियों के आगे बढ़ने के साथ सामने आएगा।

Key Highlights

  • कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग में MC² का उद्घाटन किया गया।

  • कुलपति प्रोफेसर सोम नाथ सचदेवा ने केंद्र का उद्घाटन किया।

  • विश्वविद्यालय ने परियोजना के लिए लगभग ₹11.67 करोड़ का योगदान दिया।

  • ANRF PAIR ग्रांट के तहत करीब ₹10.5 करोड़ मिले।

  • दोनों राशियों का कुल योग लगभग ₹22.17 करोड़ है।

  • केंद्र में भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और पर्यावरण अध्ययन में संयुक्त शोध को बढ़ावा मिलेगा।

  • GC-MS, BET सरफेस एरिया एनालाइजर, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन और बैटरी टेस्टर जैसे उपकरण शामिल हैं।

  • ANRF और NMHS की सहायता से विश्वविद्यालय के शोध तंत्र को भी मजबूती मिली है।

FAQ Section

1. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में MC² क्या है?

MC² का पूरा नाम मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर है। यह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में स्थापित एक शोध केंद्र है, जहां आधुनिक उपकरणों के माध्यम से सामग्रियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।

2. MC² का उद्घाटन किसने किया?

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर सोम नाथ सचदेवा ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया।

3. केंद्र के लिए कितनी वित्तीय सहायता मिली है?

विश्वविद्यालय ने लगभग ₹11.67 करोड़ का योगदान दिया है और ANRF PAIR ग्रांट से करीब ₹10.5 करोड़ मिले हैं। दोनों का कुल योग लगभग ₹22.17 करोड़ है।

4. MC² में किन विषयों में शोध किया जा सकेगा?

केंद्र में भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और पर्यावरण अध्ययन सहित कई क्षेत्रों में अंतरविषयक शोध को बढ़ावा देने की योजना है।

5. केंद्र में कौन-कौन से आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें GC-MS, BET सरफेस एरिया एनालाइजर, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन और बैटरी टेस्टर शामिल हैं। इसके अलावा उच्च तापमान पर प्रयोग करने से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

Conclusion

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर की स्थापना वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। विश्वविद्यालय के निवेश और ANRF PAIR ग्रांट से मिले सहयोग के जरिए यह केंद्र विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को एक साझा मंच उपलब्ध करा सकता है। इसकी दीर्घकालिक उपयोगिता केंद्र की प्रयोगात्मक सुविधाओं, शोध परियोजनाओं और अकादमिक सहयोग के विस्तार पर निर्भर करेगी।Screenshot_257

Edited By: Atul Sharma

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