- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- पंजाब में पराली जलाने के मामलों में तरनतारन सबसे आगे, 318 घटनाएं दर्ज; 7.80 लाख रुपये का जुर्माना
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में तरनतारन सबसे आगे, 318 घटनाएं दर्ज; 7.80 लाख रुपये का जुर्माना
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में पराली जलाने की समस्या को लेकर चिंता; अमृतसर में पिछले साल के मुकाबले घटनाओं में मामूली गिरावट दर्ज।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं पर्यावरण और मिट्टी की सेहत के लिए चुनौती बनी हुई हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन में इस साल अब तक 318 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, अमृतसर में 154 घटनाएं सामने आईं। प्रशासन पराली प्रबंधन, जागरूकता और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में जुटा है।
पंजाब में धान की पराली जलाने का मुद्दा एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें तरनतारन सबसे ऊपर है।
आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन जिले में अब तक खेतों में आग लगने की 318 घटनाएं दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने 299 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इन मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है और संबंधित खेतों के रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टियां भी दर्ज की गई हैं।
तरनतारन में 318 घटनाएं, 7.80 लाख रुपये का जुर्माना
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने कार्रवाई की है।
-
पराली जलाने की दर्ज घटनाएं: 318
-
निरीक्षण किए गए स्थान: 299
-
पराली जलाने की पुष्टि वाले स्थान: 152
-
पर्यावरणीय मुआवजे के मामले: 152
-
कुल जुर्माना: ₹7.80 लाख
-
दर्ज FIR: 64
-
खेतों के रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टियां: 152
ये आंकड़े पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई को दर्शाते हैं।
अमृतसर में पराली जलाने की 154 घटनाएं
अमृतसर जिले में पराली जलाने की 154 घटनाएं दर्ज की गईं। प्रशासन ने 150 स्थानों का निरीक्षण किया और इनमें से 75 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
PPCB के अनुसार, 15 सितंबर से 26 अक्टूबर की अवधि में अमृतसर में पराली जलाने के मामलों की संख्या पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम रही। वर्ष 2024 की इसी अवधि में जिले में 472 घटनाएं दर्ज की गई थीं।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में इस वर्ष और पिछले वर्ष के बीच के अंतर को देखते हुए भी यह स्पष्ट है कि पराली जलाने की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
तरनतारन में पिछले साल के मुकाबले बढ़ीं घटनाएं
PPCB के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 26 अक्टूबर तक तरनतारन में पराली जलाने की 305 घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 224 थी, जबकि वर्ष 2024 में करीब 362 घटनाएं सामने आई थीं।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि तरनतारन में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, हालांकि 2024 के स्तर से संख्या कम रही।
जिले में घटनाओं के बढ़ने से पराली प्रबंधन और खेतों में आग लगाने की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
प्रशासन जागरूकता और पराली प्रबंधन पर दे रहा जोर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रशासन धान की पराली को पेलेट बनाने वाले संयंत्रों, ईंट-भट्ठों और अन्य औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उपयोग के वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही, जिला प्रशासन फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि खेती की ऐसी पद्धतियों को बढ़ावा मिले जिनसे पराली प्रबंधन की समस्या कम हो सके।
पराली जलाने से बचने के लिए अपनाई जा रही वैकल्पिक व्यवस्था
प्रशासन पराली के खेत से बाहर प्रबंधन यानी एक्स-सीटू स्टबल मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत कृषि अवशेषों को खेत से इकट्ठा करना, उनकी गांठें बनाना, परिवहन करना और सुरक्षित भंडारण करना शामिल है।
इससे किसानों को खेतों से पराली हटाने का विकल्प मिलता है और अगली फसल की तैयारी के लिए खेत को साफ करने में मदद मिलती है।
हालांकि, इन प्रयासों के प्रभाव का आकलन जिलेवार आंकड़ों, किसानों की भागीदारी और पराली जलाने की घटनाओं में वास्तविक कमी के आधार पर किया जाना जरूरी है।
Key Highlights
-
तरनतारन में इस साल अब तक पराली जलाने की 318 घटनाएं दर्ज की गईं।
-
जिले में 299 स्थानों के निरीक्षण के दौरान 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
-
152 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया; कुल जुर्माना ₹7.80 लाख रहा।
-
तरनतारन में 64 FIR दर्ज की गईं।
-
अमृतसर में 154 घटनाएं दर्ज हुईं और 75 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
-
15 सितंबर से 26 अक्टूबर तक अमृतसर में घटनाएं 2024 के 472 मामलों से कम रहीं।
-
प्रशासन पराली को औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने, जागरूकता और फसल विविधीकरण पर जोर दे रहा है।
FAQ Section
1. पंजाब में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले किस जिले में दर्ज हुए?
दिए गए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन जिले में सबसे ज्यादा 318 घटनाएं दर्ज की गईं।
2. तरनतारन में पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया गया?
152 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। कुल जुर्माने की राशि ₹7.80 लाख बताई गई है।
3. अमृतसर में पराली जलाने की कितनी घटनाएं दर्ज हुईं?
अमृतसर में 154 घटनाएं दर्ज की गईं। 150 स्थानों के निरीक्षण में 75 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
4. पराली जलाने से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?
पराली जलाने से धुआं और वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों और लाभकारी जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
5. पराली जलाने से बचने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है?
प्रशासन जागरूकता अभियान चला रहा है और पराली को पेलेट संयंत्रों, ईंट-भट्ठों तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था को प्रोत्साहित कर रहा है। फसल विविधीकरण और पराली के खेत से बाहर प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है।
Conclusion
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं अब भी पर्यावरण और कृषि प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। तरनतारन में घटनाओं की बढ़ती संख्या चिंता पैदा करती है, जबकि अमृतसर में पिछले साल के मुकाबले कमी के संकेत मिले हैं। पराली के वैकल्पिक उपयोग, किसानों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने और जागरूकता बढ़ाने जैसे उपाय इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। आने वाले समय में इन प्रयासों की सफलता का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और खेतों में आग लगने की घटनाओं में वास्तविक कमी से किया जाएगा।

