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GNDU में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप शुरू, छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर होगा मंथन
कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग और GNDU की संयुक्त पहल; श्रीलंका, मलेशिया और ब्रुनेई समेत कॉमनवेल्थ देशों के 11 प्रतिनिधि और भारत से 50 प्रतिभागी ले रहे हिस्सा।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU), अमृतसर में ग्रेजुएट रोजगार क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ एशिया ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी वर्कशॉप शुरू हुई। कार्यक्रम में भारत और विभिन्न कॉमनवेल्थ देशों के शिक्षाविद् उच्च शिक्षा, व्यावहारिक कौशल, पाठ्यक्रम में बदलाव और रोजगार बाजार की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा करेंगे।
अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) में उच्च शिक्षा को रोजगार की जरूरतों से जोड़ने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग-कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (COL-CEMCA), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और शिक्षा में व्यावहारिक कौशल को अधिक महत्व देना है।
यह कार्यशाला अमृतसर के 450वें वर्षगांठ समारोह को समर्पित है, जिसका आयोजन अगले वर्ष निर्धारित है। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के निदेशक प्रोफेसर गणेशन कन्नाबिरन, COL-CEMCA के निदेशक प्रोफेसर बी. शद्रच और GNDU के कुलपति प्रोफेसर करमजीत सिंह शामिल हुए।
भारत समेत कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा
इस तीन दिवसीय कार्यशाला में कॉमनवेल्थ देशों के 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें श्रीलंका, मलेशिया और ब्रुनेई सहित विभिन्न देशों के प्रतिभागी शामिल हैं। इसके अलावा भारत से 50 प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों, शिक्षकों और शैक्षणिक नेतृत्व को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने के प्रभावी तरीकों पर विचार-विमर्श कर सकें।
शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच तालमेल पर जोर
कार्यशाला को ऐसे शैक्षणिक और सहभागितापूर्ण कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है, जो आधुनिक उच्च शिक्षा में स्नातकों की रोजगार क्षमता के बढ़ते महत्व पर केंद्रित है।
कार्यक्रम के दौरान संस्थानों के मूल्यांकन, पाठ्यक्रम में नवाचार और आपसी सहयोग के माध्यम से अकादमिक शिक्षा तथा रोजगार बाजार की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर चर्चा की जाएगी।
GNDU के कुलपति प्रोफेसर करमजीत सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम में शैक्षणिक नेतृत्व, संकाय सदस्यों और उच्च शिक्षा से जुड़े पेशेवरों को एक साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य अनुभव साझा करना और विद्यार्थियों की पेशेवर तैयारी तथा रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने के तरीके तलाशना है।
कौशल आधारित शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर चर्चा
उद्घाटन सत्र की शुरुआत GNDU के डीन, अकादमिक मामलों, प्रोफेसर हरविंदर सिंह सैनी के परिचयात्मक संबोधन से हुई।
उन्होंने कम अवधि वाले कौशल आधारित पाठ्यक्रमों की उपयोगिता और शैक्षणिक कार्यक्रमों में व्यावहारिक शिक्षा को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसी पहल ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) कार्यक्रमों को मजबूत करने और विद्यार्थियों की पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।
इस दृष्टिकोण का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कार्यस्थल पर जरूरी कौशल और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है।
तकनीक, ज्ञान और संस्थागत विकास का महत्व
GNDU के कुलपति प्रोफेसर करमजीत सिंह ने ऐसे मजबूत शैक्षणिक संस्थान विकसित करने की जरूरत पर बल दिया, जो ज्ञान, तकनीक और लोगों के बीच प्रभावी संबंध स्थापित कर सकें।
वहीं, COL-CEMCA के निदेशक प्रोफेसर बी. शद्रच ने उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने आने वाली उस चुनौती को रेखांकित किया, जिसमें शैक्षणिक कार्यक्रमों को श्रम बाजार की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना शामिल है।
कार्यशाला में इस बात पर विचार किया जाएगा कि संस्थान अपने पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और व्यावहारिक प्रशिक्षण को किस तरह विकसित कर सकते हैं, ताकि स्नातक रोजगार की बदलती जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिलेगा मंच
इस कार्यशाला के माध्यम से भारत और अन्य कॉमनवेल्थ देशों के शिक्षाविदों को अपने अनुभव और विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पाठ्यक्रम में नवाचार और कौशल विकास पर केंद्रित चर्चाएं उच्च शिक्षा संस्थानों को रोजगारपरक शिक्षा की रणनीतियां विकसित करने में मदद कर सकती हैं। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों की पेशेवर तैयारी और भविष्य के रोजगार अवसरों को बेहतर बनाने के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।
Key Highlights
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GNDU और COL-CEMCA के सहयोग से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई।
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कार्यक्रम अमृतसर की 450वीं वर्षगांठ के समारोहों को समर्पित है, जो अगले वर्ष निर्धारित हैं।
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कॉमनवेल्थ देशों के 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और भारत से 50 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
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श्रीलंका, मलेशिया और ब्रुनेई सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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रोजगार क्षमता, कौशल आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रम में नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।
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ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
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शिक्षाविदों ने उच्च शिक्षा और श्रम बाजार की जरूरतों के बीच तालमेल बेहतर बनाने पर बल दिया।
FAQ Section
1. GNDU में कौन-सी कार्यशाला शुरू हुई है?
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ एशिया ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी वर्कशॉप शुरू हुई है।
2. कार्यशाला का आयोजन किसके सहयोग से किया गया है?
यह कार्यशाला GNDU और कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग-कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (COL-CEMCA), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित की गई है।
3. कार्यशाला में कितने प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं?
कार्यक्रम में कॉमनवेल्थ देशों के 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ भारत से 50 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
4. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को रोजगार बाजार की जरूरतों से जोड़ना, विद्यार्थियों की व्यावहारिक क्षमताएं बढ़ाना और स्नातकों को पेशेवर अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।
5. कार्यशाला में किन विषयों पर चर्चा होगी?
कार्यक्रम में कौशल आधारित पाठ्यक्रम, व्यावहारिक शिक्षा, संस्थागत मूल्यांकन, पाठ्यक्रम में नवाचार, ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग और रोजगार बाजार की जरूरतों जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
Conclusion
GNDU में आयोजित कॉमनवेल्थ एशिया ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी वर्कशॉप उच्च शिक्षा को रोजगार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक अंतरराष्ट्रीय पहल है। भारत और कॉमनवेल्थ देशों के शिक्षाविदों की भागीदारी से कौशल आधारित शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम सुधार पर नए विचार सामने आने की उम्मीद है। कार्यशाला के निष्कर्ष उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की पेशेवर तैयारी बेहतर बनाने के लिए उपयोगी दिशा प्रदान कर सकते हैं।

