नकोदर कांड की 40वीं बरसी पर बुधवार को न्याय की अंतिम उम्मीद के साथ विभिन्न सिख संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शांति मार्च निकाला। यह मार्च गुरुद्वारा गुरु नानक देव जी, शेरपुर से शुरू हुआ, जिसकी अगुवाई सिख सद्भावना दल और ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन ने की।
मार्च के दौरान शहीद हुए चार युवकों—हरमिंदर सिंह, झिलमन सिंह, बलधीर सिंह और रविंदर सिंह लिट्रां—को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बताया गया कि तीन युवकों के माता-पिता अपने जीवनकाल में न्याय नहीं देख सके, जबकि रविंदर सिंह लिट्रां के पिता बलदेव सिंह (79) आज भी न्याय की लड़ाई जारी रखे हुए हैं।
बलदेव सिंह ने मार्च में शामिल युवाओं और सिख कार्यकर्ताओं को उन सभी स्थानों पर ले जाकर घटनाक्रम की जानकारी दी, जहां 4 फरवरी 1986 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस द्वारा पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोलीबारी की गई थी। यह प्रदर्शन गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के विरोध में किया जा रहा था। यह मामला बाद में बेहबल कलां बेअदबी और गोलीकांड जैसा माना गया। उस समय रविंदर सिंह की उम्र मात्र 19 वर्ष थी।
बलदेव सिंह ने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांचें तो हुईं, लेकिन आज तक कार्रवाई रिपोर्ट सामने नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग की 300 पन्नों की रिपोर्ट में से केवल 55 पन्ने ही सार्वजनिक किए गए, जबकि सबसे महत्वपूर्ण हिस्से अब भी गायब हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले 40 वर्षों में पंजाब को 10 से अधिक मुख्यमंत्री मिले, लेकिन मैंने सभी से न्याय की गुहार लगाई और आज तक कुछ हासिल नहीं हुआ। यह लड़ाई मैं अपने आखिरी सांस तक लड़ता रहूंगा।”
मार्च में शामिल संगठनों ने मांग की कि पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को चार दशक बाद ही सही, न्याय मिल सके।
