मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लाभार्थियों के पंजीकरण कार्य को तेज करने के लिए पटियाला जिले के 112 सरकारी स्कूलों को अपने कंप्यूटर संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इन कंप्यूटरों का उपयोग गांव स्तर पर योजना के तहत डेटा एंट्री के लिए किया जाएगा।
सरकारी आदेशों के अनुसार, पंचायतों में कंप्यूटर लगाकर स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों का डेटा तैयार किया जाना है। हालांकि, इस फैसले ने कंप्यूटर शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अंतिम सत्र की परीक्षाएं और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं नजदीक हैं। यूनियनों ने सवाल उठाया है कि यदि कंप्यूटर ही उपलब्ध नहीं होंगे तो छात्रों का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा।
एक शिक्षक संगठन के नेता ने कहा, “यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कंप्यूटर कितने समय के लिए पंचायतों को दिए जाएंगे। कक्षा आठवीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं, ऐसे में प्रैक्टिकल कैसे कराए जाएंगे?”
कंप्यूटर टीचर यूनियन, पंजाब के उपाध्यक्ष हनी गर्ग ने स्कूलों की बदहाल स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई स्कूलों में कंप्यूटर लैब में पहले से ही केवल दो या तीन कंप्यूटर ही काम कर रहे थे, और अब वे भी ले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि यदि कंप्यूटर में कोई खराबी आती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार एक ओर डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों से बुनियादी संसाधन हटाए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई और परीक्षाएं बाधित न हों।
