पंजाब के सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने बुधवार को संसद के उच्च सदन में महत्वपूर्ण मांग उठाई। विशेष उल्लेख के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से पंजाब में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया।
संधू ने कहा कि पंजाब का सहकारी क्षेत्र राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने सहकारिता को भारत की सामूहिक चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा, “सहकारिता केवल एक वित्तीय व्यवस्था नहीं, बल्कि एक संस्कृति है—सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि सामूहिक और समावेशी विकास की जीवंत परंपरा है।”
उन्होंने बताया कि पंजाब की धरती ने पिछले 135 वर्षों से सहकारिता की जड़ों को पोषित किया है। वर्ष 1891 में पंजाब में पहली सहकारी संस्था की स्थापना का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि साझी भूमि और साझा समृद्धि था। भूमि सुधार से लेकर हरित और श्वेत क्रांति तक, सहकारी संस्थाएं पंजाब की कृषि और ग्रामीण विकास की निर्विवाद आधारशिला रही हैं।
संधू ने कहा कि वर्तमान में पंजाब में लगभग 20,000 सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 35 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। उन्होंने इसे पंजाब की एक गौरवपूर्ण सफलता कहानी बताया, जो राज्य की बड़ी आबादी के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब मार्कफेड, जिसने बेहद सीमित पूंजी से शुरुआत की थी, आज एशिया की सबसे बड़ी मार्केटिंग सहकारी संस्था बन चुकी है और इसका वार्षिक कारोबार करीब 22,000 करोड़ रुपये है।
संधू ने कहा कि यदि पंजाब में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाता है, तो इससे सहकारी संस्थाओं में पेशेवर प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और राज्य का सहकारी ढांचा भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सक्षम बन सकेगा।
