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लुधियाना में HPV टीकाकरण अभियान धीमा, 40,000 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 225 लड़कियों को लगा टीका
जागरूकता की कमी और झिझक बनी बड़ी बाधा, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बढ़ाई चिंता
लुधियाना में चल रहे HPV टीकाकरण अभियान की रफ्तार बेहद धीमी है। 40 दिन में केवल 225 लड़कियों को टीका लगाया जा सका है, जिससे लक्ष्य पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से 5 मार्च को शुरू किया गया 90-दिवसीय टीकाकरण अभियान गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
इस अभियान का लक्ष्य 40,000 लड़कियों को टीका लगाना था, लेकिन 40 दिनों के बाद लुधियाना जिले में केवल 225 लड़कियों को ही यह टीका लगाया जा सका है। यह बड़ा अंतर अभियान की धीमी गति को दर्शाता है और इसकी सफलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह अभियान 19 सरकारी स्कूल केंद्रों में चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य देश में महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक सर्वाइकल कैंसर को कम करना है। हालांकि, जागरूकता की कमी और परिवारों की झिझक इसके मार्ग में बड़ी बाधा बन रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
डॉ. हरप्रीत सिंह (जिला टीकाकरण अधिकारी) ने परिवारों को टीकाकरण से पहले उचित तैयारी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि HPV वैक्सीन की 0.5 मिलीलीटर की एक खुराक बाएं हाथ की मांसपेशी में दी जाती है। टीकाकरण के बाद हर लड़की को 30 मिनट तक स्वास्थ्य केंद्र में निगरानी में रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि टीका लगवाने के लिए आधार कार्ड लाना जरूरी है और टीकाकरण के बाद प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि टीका खाली पेट नहीं लगवाना चाहिए।
डॉ. रमणदीप कौर ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर उन कैंसरों में से एक है जिसे समय पर टीकाकरण और जागरूकता के जरिए रोका जा सकता है।” उन्होंने बताया कि HPV वैक्सीन सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी है और 14 से 15 वर्ष की लड़कियों के माता-पिता से अपील की कि वे अपनी बेटियों को यह टीका जरूर लगवाएं।
वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वीना ने सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इसकी सफलता में परिवारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यह एक सराहनीय प्रयास है, लेकिन अंततः यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपनी बेटियों का टीकाकरण सुनिश्चित करें।”
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जागरूकता अभियान को तेज नहीं किया गया और लॉजिस्टिक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो लुधियाना अपने लक्ष्य से काफी पीछे रह सकता है। 40,000 के लक्ष्य और अब तक हुए 225 टीकाकरण के बीच का अंतर इस बात को दर्शाता है कि सामुदायिक भागीदारी, बेहतर संवाद और भ्रांतियों को दूर करने के लिए ठोस प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है।

